भगवान शिव (अमोघ शिव कवच) कवच मंत्र
ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
महान एवं असाध्य रोगों से मुक्ति, अकाल मृत्यु तथा मृत्युभय का पूर्ण शमन, तत्काल सुख व दीर्घायु की प्राप्ति, और किसी भी तंत्र-मंत्र या नकारात्मक शक्तियों के दुष्प्रभाव से संपूर्ण सुरक्षा 6।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
महान एवं असाध्य रोगों से मुक्ति, अकाल मृत्यु तथा मृत्युभय का पूर्ण शमन, तत्काल सुख व दीर्घायु की प्राप्ति, और किसी भी तंत्र-मंत्र या नकारात्मक शक्तियों के दुष्प्रभाव से संपूर्ण सुरक्षा 6।
इस मंत्र से क्या होगा?
महान एवं असाध्य रोगों से मुक्ति, अकाल मृत्यु तथा मृत्युभय का पूर्ण शमन, तत्काल सुख व दीर्घायु की प्राप्ति, और किसी भी तंत्र-मंत्र या नकारात्मक शक्तियों के दुष्प्रभाव से संपूर्ण सुरक्षा
जाप विधि
पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ शुद्ध होकर शिवलिंग या यंत्र का पूजन करें। तदुपरांत इस उत्तम शिव कवच का नित्य पाठ करें तथा भगवान शिव की कृपा हेतु इसे धारण करें 5।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते। 45
vaidik mantraॐ एतावानस्य महिमातो ज्यायांश्च पूरुषः । पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि ॥
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraहरिप्रिया
navgrah mantraॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
bhakti mantraॐ आदित्याय नमः