पुरुष / पुरुष सूक्त (१०.९०.३) वैदिक मंत्र
ॐ एतावानस्य महिमातो ज्यायांश्च पूरुषः । पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि ॥
सांसारिक आसक्ति से मुक्ति, ब्रह्म की अनन्त महिमा का ज्ञान एवं पारलौकिक शांति की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
सांसारिक आसक्ति से मुक्ति, ब्रह्म की अनन्त महिमा का ज्ञान एवं पारलौकिक शांति की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक आसक्ति से मुक्ति, ब्रह्म की अनन्त महिमा का ज्ञान एवं पारलौकिक शांति की प्राप्ति
जाप विधि
आभ्यन्तर ध्यान के समय नेत्र बंद कर परमात्मा के विराट् स्वरूप का चिंतन करते हुए मानसिक जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraगणाधीश
navgrah mantraपलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्। रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥
bhakti mantraगोपाला गोपाला देवकीनन्दन गोपाला
tantrik mantraॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा
stotra mantraअच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरमं राधिकाराधितम्। इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे।। 9