पुरुष / पुरुष सूक्त (१०.९०.३) वैदिक मंत्र
ॐ एतावानस्य महिमातो ज्यायांश्च पूरुषः । पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि ॥
सांसारिक आसक्ति से मुक्ति, ब्रह्म की अनन्त महिमा का ज्ञान एवं पारलौकिक शांति की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सांसारिक आसक्ति से मुक्ति, ब्रह्म की अनन्त महिमा का ज्ञान एवं पारलौकिक शांति की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक आसक्ति से मुक्ति, ब्रह्म की अनन्त महिमा का ज्ञान एवं पारलौकिक शांति की प्राप्ति
जाप विधि
आभ्यन्तर ध्यान के समय नेत्र बंद कर परमात्मा के विराट् स्वरूप का चिंतन करते हुए मानसिक जप।
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