अग्नि / अग्नि सूक्त (१.१.२) वैदिक मंत्र
ॐ अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत । स देवाँ एह वक्षति ॥
प्राचीन एवं नवीन ऋषियों की परम्परा से जुड़ना एवं देव-शक्तियों का यज्ञ-स्थल पर आवाहन।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
प्राचीन एवं नवीन ऋषियों की परम्परा से जुड़ना एवं देव-शक्तियों का यज्ञ-स्थल पर आवाहन।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्राचीन एवं नवीन ऋषियों की परम्परा से जुड़ना एवं देव-शक्तियों का यज्ञ-स्थल पर आवाहन
जाप विधि
यज्ञ की अग्नि प्रज्ज्वलित करते समय अथवा अग्नि-स्थापना के समय सस्वर उच्चारण।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
sabar mantraक्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18
navgrah mantraॐ जैमिनिगोत्राय विद्महे धूम्रवर्णाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
mool mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)
tantrik mantraॐ नाशय नाशय सर्व दुष्टं नाशय फट् स्वाहा अरुण वरुण माला लंकृता शंकराग्रे विद्रुत परसु शक्तिम पुष्प बाणुचापंम विविध फण फणंद्र भूषण भूषितंग शरबिलनाथं नौम्य सालुवे
kaamya mantraदेवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥