अग्नि / अग्नि सूक्त (१.१.२) वैदिक मंत्र
ॐ अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत । स देवाँ एह वक्षति ॥
प्राचीन एवं नवीन ऋषियों की परम्परा से जुड़ना एवं देव-शक्तियों का यज्ञ-स्थल पर आवाहन।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
प्राचीन एवं नवीन ऋषियों की परम्परा से जुड़ना एवं देव-शक्तियों का यज्ञ-स्थल पर आवाहन।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्राचीन एवं नवीन ऋषियों की परम्परा से जुड़ना एवं देव-शक्तियों का यज्ञ-स्थल पर आवाहन
जाप विधि
यज्ञ की अग्नि प्रज्ज्वलित करते समय अथवा अग्नि-स्थापना के समय सस्वर उच्चारण।
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चंद्र
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