ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
परब्रह्म (सत्य और प्रकाश स्वरूप)

परब्रह्म (सत्य और प्रकाश स्वरूप) ध्यान मंत्र

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना

जाप विधि

किसी भी ध्यान सत्र के अंत में शांत भाव से इसका मानसिक श्रवण या गान करें। दृष्टि को अज्ञान से ज्ञान की ओर और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का संकल्प लें।

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