परब्रह्म (सत्य और प्रकाश स्वरूप) ध्यान मंत्र
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना
जाप विधि
किसी भी ध्यान सत्र के अंत में शांत भाव से इसका मानसिक श्रवण या गान करें। दृष्टि को अज्ञान से ज्ञान की ओर और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का संकल्प लें।
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वायु
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
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