परब्रह्म (सत्य और प्रकाश स्वरूप) ध्यान मंत्र
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना
जाप विधि
किसी भी ध्यान सत्र के अंत में शांत भाव से इसका मानसिक श्रवण या गान करें। दृष्टि को अज्ञान से ज्ञान की ओर और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का संकल्प लें।
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धूं धूं तंत्र बंधम स्तंभय नाशाय ठ: ठ: फट्
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
bhakti mantraॐ श्री कृष्णाय नमः
gyan mantraउद्गीथ प्रणवोद्गीत सर्व वागीश्वरेश्वर । सर्व वेदमया चिन्त्यः सर्वं बोधय बोधय ॥