परब्रह्म (सत्य और प्रकाश स्वरूप) ध्यान मंत्र
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
अवास्तविक (माया) से वास्तविक (सत्य) की ओर प्रस्थान, अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना, और अमरता की प्रत्यक्ष अनुभूति करना
जाप विधि
किसी भी ध्यान सत्र के अंत में शांत भाव से इसका मानसिक श्रवण या गान करें। दृष्टि को अज्ञान से ज्ञान की ओर और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का संकल्प लें।
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