अंतर्मन की विशोक ज्योति (Inner Divine Light) ध्यान मंत्र
विशोका वा ज्योतिष्मती
चित्त को शोक और दुःख से मुक्त करना, भावनात्मक लचीलापन विकसित करना, और मन की स्थिति को स्थिर एवं उज्ज्वल बनाना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
चित्त को शोक और दुःख से मुक्त करना, भावनात्मक लचीलापन विकसित करना, और मन की स्थिति को स्थिर एवं उज्ज्वल बनाना।
इस मंत्र से क्या होगा?
चित्त को शोक और दुःख से मुक्त करना, भावनात्मक लचीलापन विकसित करना, और मन की स्थिति को स्थिर एवं उज्ज्वल बनाना
जाप विधि
आँखें बंद करके अपने हृदय चक्र (वक्ष के मध्य) या आज्ञा चक्र में एक अत्यंत शांत, शोकरहित और दैवीय प्रकाश की कल्पना करें। उठने वाले विचारों को बिना प्रतिक्रिया दिए गुजरने दें और चेतना को प्रकाश पर स्थिर रखें।
विशेष टिप्पणियाँ
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नासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
jap mantraॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
beej mantraस्रां
ugra mantraॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं असितांग भैरवाय, सर्व शाप विमोचनाय, मम कार्यं कुरु कुरु स्वाहा
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