शनि देव बीज बीज मंत्र
प्रीं
शनि देव के मारक और क्रूर प्रभावों को शांत करना 70।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
शनि देव के मारक और क्रूर प्रभावों को शांत करना 70।
इस मंत्र से क्या होगा?
शनि देव के मारक और क्रूर प्रभावों को शांत करना
जाप विधि
शाम या रात के समय 108 बार 63।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ नाशय नाशय सर्व दुष्टं नाशय फट् स्वाहा अरुण वरुण माला लंकृता शंकराग्रे विद्रुत परसु शक्तिम पुष्प बाणुचापंम विविध फण फणंद्र भूषण भूषितंग शरबिलनाथं नौम्य सालुवे
kaamya mantraॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्॥
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
kavach mantraॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
sabar mantraओम नमो आदेश गुरु को कामरूप कामाख्या माई अपनी शक्ति से अमुक मेरी इच्छा पूरी करो ना करो तो ईश्वर महादेव की दुहाई 19
gyan mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥