शनि देव बीज बीज मंत्र
प्रौं
पिछले जन्मों के संचित बुरे कर्मों के फलों से रक्षा, जीवन में अत्यधिक स्थिरता और न्याय की प्राप्ति 60।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पिछले जन्मों के संचित बुरे कर्मों के फलों से रक्षा, जीवन में अत्यधिक स्थिरता और न्याय की प्राप्ति 60।
इस मंत्र से क्या होगा?
पिछले जन्मों के संचित बुरे कर्मों के फलों से रक्षा, जीवन में अत्यधिक स्थिरता और न्याय की प्राप्ति
जाप विधि
रात्रिकाल में रुद्राक्ष माला से जप 60।
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ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं राम् श्रीं ॐ राधायै स्वाहा ॐ
stotra mantraनमः समस्तभूतानामादिभूताय भूभृते । अनेकरुपरुपाय विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ 2
tantrik mantraॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्री बगलाने मम रिपून नाशय नाशय ममैश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवांछितं साधय साधय ह्रीं स्वाहा
jap mantraश्री राम जय राम जय जय राम
shanti mantraलोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥