मातृका देवी / वर्णेश्वरी (मूलाधार चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
वं, शं, षं, सं
यह नाद देवी का साक्षात स्वरूप है, जो मूलाधार चक्र की सुप्त ऊर्जा को जागृत कर कुण्डलिनी शक्ति को ऊपर उठाने का मजबूत आधार प्रदान करता है 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यह नाद देवी का साक्षात स्वरूप है, जो मूलाधार चक्र की सुप्त ऊर्जा को जागृत कर कुण्डलिनी शक्ति को ऊपर उठाने का मजबूत आधार प्रदान करता है 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह नाद देवी का साक्षात स्वरूप है, जो मूलाधार चक्र की सुप्त ऊर्जा को जागृत कर कुण्डलिनी शक्ति को ऊपर उठाने का मजबूत आधार प्रदान करता है
जाप विधि
मूलाधार चक्र की चार पंखुड़ियों का मानसिक दर्शन करते हुए पूर्ण शुद्धता से जप करें 2।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
jap mantraसोऽहम्
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ugra mantraॐ खं खं खं सर्व शत्रु संहारणाय स्वाहा
shanti mantraलोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
stotra mantraश्रीवत्सधामापररात्र ईशः प्रत्यूष ईशोऽसिधरो जनार्दनः। दामोदरोऽव्यादनुसन्ध्यं प्रभाते विश्वेश्वरो भगवान् कालमूर्तिः।। 7