मातृका देवी / वर्णेश्वरी (मूलाधार चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
वं, शं, षं, सं
यह नाद देवी का साक्षात स्वरूप है, जो मूलाधार चक्र की सुप्त ऊर्जा को जागृत कर कुण्डलिनी शक्ति को ऊपर उठाने का मजबूत आधार प्रदान करता है 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह नाद देवी का साक्षात स्वरूप है, जो मूलाधार चक्र की सुप्त ऊर्जा को जागृत कर कुण्डलिनी शक्ति को ऊपर उठाने का मजबूत आधार प्रदान करता है 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह नाद देवी का साक्षात स्वरूप है, जो मूलाधार चक्र की सुप्त ऊर्जा को जागृत कर कुण्डलिनी शक्ति को ऊपर उठाने का मजबूत आधार प्रदान करता है
जाप विधि
मूलाधार चक्र की चार पंखुड़ियों का मानसिक दर्शन करते हुए पूर्ण शुद्धता से जप करें 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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ugra mantraॐ स्त्रीं आं अक्षोभ्य स्वाहा
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
naam mantraसैंहिकेय
navgrah mantraॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा॥
jap mantraॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः