अग्नि देव (अग्नि तत्व) बीज बीज मंत्र
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शरीर के अग्नि तत्व की प्रचंड वृद्धि, कमजोर पाचन शक्ति में तत्काल सुधार, माइग्रेन व सिरदर्द से परम राहत, और जीवन में परिवर्तनकारी ऊर्जा (Transformative energy) का संचार 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शरीर के अग्नि तत्व की प्रचंड वृद्धि, कमजोर पाचन शक्ति में तत्काल सुधार, माइग्रेन व सिरदर्द से परम राहत, और जीवन में परिवर्तनकारी ऊर्जा (Transformative energy) का संचार 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
शरीर के अग्नि तत्व की प्रचंड वृद्धि, कमजोर पाचन शक्ति में तत्काल सुधार, माइग्रेन व सिरदर्द से परम राहत, और जीवन में परिवर्तनकारी ऊर्जा (Transformative energy) का संचार
जाप विधि
सूर्योदय के समय मणिपूर चक्र (Solar Plexus) पर ध्यान करते हुए 108 बार जप करें 19।
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श्यामा
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
sabar mantraमाई नथिया पांचो बावरी पीर गोगा जहार वर तेरे साथ चले चलो इस्माइल जोगी चलो मेरे शब्द पर चलो सत्य पर धर्म पर चलो ना चलो तो आदि शक्ति कामाख्या की आन माता सहजा योगिन की आन शिवशंकर की आन शब्द साचा पेंड काचा देखो इस्माल जोगी तेरे शब्द का तमाशा सत्य का नाम आदेश आदेश आदेश 14
navgrah mantraॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपां रेतां सि जिन्वति।।
bhakti mantraराधे कृष्ण राधे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण राधे राधे
gyan mantraॐ अक्षरेस्वराय विद्महे मन्त्रराजाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात् ॥