भगवान श्रीराम (धनुर्धारी स्वरूप) ध्यान मंत्र
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना
जाप विधि
बद्धपद्मासन में बैठकर भगवान राम के नीलमेघ वर्ण, लंबी भुजाओं (आजानुबाहु) वाले और धनुष-बाण धारण किए शांत स्वरूप का ध्यान करें। उनके वाम अंक में माता सीता का स्मरण करते हुए इसका पाठ करें।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
भार्गव
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
sabar mantraऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की। शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय 13
beej mantraल्क्ष्मीं
gyan mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥