भगवान श्रीराम (धनुर्धारी स्वरूप) ध्यान मंत्र
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना
जाप विधि
बद्धपद्मासन में बैठकर भगवान राम के नीलमेघ वर्ण, लंबी भुजाओं (आजानुबाहु) वाले और धनुष-बाण धारण किए शांत स्वरूप का ध्यान करें। उनके वाम अंक में माता सीता का स्मरण करते हुए इसका पाठ करें।
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