ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान श्रीराम (धनुर्धारी स्वरूप)

भगवान श्रीराम (धनुर्धारी स्वरूप) ध्यान मंत्र

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥

मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मन में असीम शांति और निर्भयता लाना, सूक्ष्म शरीर की सुरक्षा की भावना जागृत करना, और इष्टदेव के प्रति पूर्ण शरणागति प्राप्त करना

जाप विधि

बद्धपद्मासन में बैठकर भगवान राम के नीलमेघ वर्ण, लंबी भुजाओं (आजानुबाहु) वाले और धनुष-बाण धारण किए शांत स्वरूप का ध्यान करें। उनके वाम अंक में माता सीता का स्मरण करते हुए इसका पाठ करें।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

naam mantra

कार्तिकेय

siddh mantra

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा ॥

jap mantra

ॐ दाम् दत्तात्रेयाय स्वाहा

bhakti mantra

गणेश शरणं शरणं गणेश

gyan mantra

अहं ब्रह्मास्मि

kavach mantra

सकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17