भगवान विष्णु (शान्ताकार स्वरूप) ध्यान मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
मन से सभी प्रकार के सांसारिक भयों व चिंताओं को नष्ट करना, इष्ट देव के शांत स्वरूप के माध्यम से चित्त में असीम शांति की स्थापना करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन से सभी प्रकार के सांसारिक भयों व चिंताओं को नष्ट करना, इष्ट देव के शांत स्वरूप के माध्यम से चित्त में असीम शांति की स्थापना करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन से सभी प्रकार के सांसारिक भयों व चिंताओं को नष्ट करना, इष्ट देव के शांत स्वरूप के माध्यम से चित्त में असीम शांति की स्थापना करना
जाप विधि
शांत चित्त होकर बैठें और मानस पटल पर भगवान विष्णु को क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए, मेघ के समान नीले वर्ण और नाभि से कमल उत्पन्न होते हुए रूप में विज़ुअलाइज़ करें। मुख्य जप से पूर्व इसका मानसिक पाठ करें।
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