ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान विष्णु (शान्ताकार स्वरूप)

भगवान विष्णु (शान्ताकार स्वरूप) ध्यान मंत्र

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

मन से सभी प्रकार के सांसारिक भयों व चिंताओं को नष्ट करना, इष्ट देव के शांत स्वरूप के माध्यम से चित्त में असीम शांति की स्थापना करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मन से सभी प्रकार के सांसारिक भयों व चिंताओं को नष्ट करना, इष्ट देव के शांत स्वरूप के माध्यम से चित्त में असीम शांति की स्थापना करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मन से सभी प्रकार के सांसारिक भयों व चिंताओं को नष्ट करना, इष्ट देव के शांत स्वरूप के माध्यम से चित्त में असीम शांति की स्थापना करना

जाप विधि

शांत चित्त होकर बैठें और मानस पटल पर भगवान विष्णु को क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए, मेघ के समान नीले वर्ण और नाभि से कमल उत्पन्न होते हुए रूप में विज़ुअलाइज़ करें। मुख्य जप से पूर्व इसका मानसिक पाठ करें।

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शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥ 12

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