देवराज इंद्र (पृथ्वी तत्व) बीज बीज मंत्र
लं
शरीर में पृथ्वी तत्व की जागृति, अत्यधिक भौतिक स्थिरता, देवराज इंद्र के समान ऐश्वर्य और जीवन में आधारभूत सुरक्षा (Foundation) की प्राप्ति 52।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शरीर में पृथ्वी तत्व की जागृति, अत्यधिक भौतिक स्थिरता, देवराज इंद्र के समान ऐश्वर्य और जीवन में आधारभूत सुरक्षा (Foundation) की प्राप्ति 52।
इस मंत्र से क्या होगा?
शरीर में पृथ्वी तत्व की जागृति, अत्यधिक भौतिक स्थिरता, देवराज इंद्र के समान ऐश्वर्य और जीवन में आधारभूत सुरक्षा (Foundation) की प्राप्ति
जाप विधि
मूलाधार चक्र (Root Chakra) पर पूर्ण ध्यान केंद्रित करते हुए 108 बार जप करें 19।
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ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
jap mantraॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय-भंजय हुं फट् स्वाहा
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
stotra mantraजलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर्यादोगणेभ्यो वरूणस्य पाशात्। स्थलेषु मायावटुवामनोsव्यात् त्रिविक्रमः खेऽवतु विश्वरूपः।। 7