शुक्र देव बीज बीज मंत्र
द्रीं
प्रचुर भौतिक सुख, असीम विलासिता (Luxury) और समृद्धि की तीव्र प्राप्ति 68।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
प्रचुर भौतिक सुख, असीम विलासिता (Luxury) और समृद्धि की तीव्र प्राप्ति 68।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रचुर भौतिक सुख, असीम विलासिता (Luxury) और समृद्धि की तीव्र प्राप्ति
जाप विधि
प्रातः काल 108 बार जप 62।
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ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
stotra mantraसर्वाण्येतानि भगन्नामरूपास्त्रकीर्तनात्। प्रयान्तु संक्षयं सद्यो ये नः श्रेयः प्रतीपकाः।। 7
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naam mantraराहु
kaamya mantraॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
vaidik mantraॐ अहमेव स्वयमिदं वदामि जुष्टं देवेभिरुत मानुषेभिः । यं कामये तंतमुग्रं कृणोमि तं ब्रह्माणं तमृषिं तं सुमेधाम् ॥