ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान भैरव बीज

भगवान भैरव बीज बीज मंत्र

स्फेम्

भैरव तत्व की जागृति, शिव की परम सुरक्षा ऊर्जा का आह्वान और उच्च स्तरीय तांत्रिक सिद्धियों (Tantric Powers) की प्राप्ति 3। भगवान विष्णु एवं उनके अवतार (नरसिंह, कृष्ण, राम, परशुराम) वैष्णव परंपरा और पंच

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारबीज मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

भैरव तत्व की जागृति, शिव की परम सुरक्षा ऊर्जा का आह्वान और उच्च स्तरीय तांत्रिक सिद्धियों (Tantric Powers) की प्राप्ति 3। भगवान विष्णु एवं उनके अवतार (नरसिंह, कृष्ण, राम, परशुराम) वैष्णव परंपरा और पंचरात्र आगमों में भगवान विष्णु और उनके दशावतारों के बीज मंत्रों को ब्रह्मांडीय संतुलन, धर्म की स्थापना और साधक के पोषण का मूल माना गया है 25। ये बीज मंत्र विष्णु के सत्त्व गुण को जागृत कर साधक को भौतिक समृद्धि, आकर्षण और अजेय सुरक्षा प्रदान करते हैं 15।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

भैरव तत्व की जागृति, शिव की परम सुरक्षा ऊर्जा का आह्वान और उच्च स्तरीय तांत्रिक सिद्धियों (Tantric Powers) की प्राप्ति 3

02

भगवान विष्णु एवं उनके अवतार (नरसिंह, कृष्ण, राम, परशुराम) वैष्णव परंपरा और पंचरात्र आगमों में भगवान विष्णु और उनके दशावतारों के बीज मंत्रों को ब्रह्मांडीय संतुलन, धर्म की स्थापना और साधक के पोषण का मूल माना गया है 25

03

ये बीज मंत्र विष्णु के सत्त्व गुण को जागृत कर साधक को भौतिक समृद्धि, आकर्षण और अजेय सुरक्षा प्रदान करते हैं

जाप विधि

रात्रिकाल में या गहन तांत्रिक ध्यान (Meditation) के दौरान एकाग्रता के साथ मानसिक जप करें 3।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kaamya mantra

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

shanti mantra

ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

vaidik mantra

ॐ त्वामग्ने पुष्करादध्यथर्वा निरमन्थत । मूर्ध्नो विश्वस्य वाघतः ॥

mool mantra

ॐ रुद्राय रोगनाशाय अगच्छ च राम ॐ नमः

dhyan mantra

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

navgrah mantra

ॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।