त्रिदेव संघटन (Hindu Trimurti) बीज बीज मंत्र
सुं
यह बीज मंत्र तीनों वेदों (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद) और त्रिदेवों के मिलन का रहस्यमयी नाम है, जो जीवन में त्रिगुण शक्ति का संतुलन करता है 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह बीज मंत्र तीनों वेदों (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद) और त्रिदेवों के मिलन का रहस्यमयी नाम है, जो जीवन में त्रिगुण शक्ति का संतुलन करता है 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह बीज मंत्र तीनों वेदों (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद) और त्रिदेवों के मिलन का रहस्यमयी नाम है, जो जीवन में त्रिगुण शक्ति का संतुलन करता है
जाप विधि
मानसिक एकाग्रता के साथ 108 बार 3।
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अहं ब्रह्मास्मि
vaidik mantraॐ इयं वेदिः परो अन्तः पृथिव्या अयं यज्ञो भुवनस्य नाभिः । अयं सोमो वृष्णो अश्वस्य रेतो ब्रह्मायं वाचः परमं व्योम ॥
mool mantraॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (सामान्य मूल: ॐ राहवे नमः)
dhyan mantraशान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
navgrah mantraदेवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
stotra mantraपद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि । परमेशि जगन्माता महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29