ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
माँ दुर्गा बीज

माँ दुर्गा बीज बीज मंत्र

दुं

इस बीज में 'द' दुर्गा का और 'उ' रक्षा का प्रतीक है। यह ईश्वरीय सुरक्षा, असीम शारीरिक और मानसिक शक्ति, अदम्य साहस, गंभीर समस्याओं व रोगों का शमन और भयंकर शत्रुओं पर पूर्ण विजय सुनिश्चित करता है 3।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारबीज मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

इस बीज में 'द' दुर्गा का और 'उ' रक्षा का प्रतीक है। यह ईश्वरीय सुरक्षा, असीम शारीरिक और मानसिक शक्ति, अदम्य साहस, गंभीर समस्याओं व रोगों का शमन और भयंकर शत्रुओं पर पूर्ण विजय सुनिश्चित करता है 3।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

इस बीज में 'द' दुर्गा का और 'उ' रक्षा का प्रतीक है

02

यह ईश्वरीय सुरक्षा, असीम शारीरिक और मानसिक शक्ति, अदम्य साहस, गंभीर समस्याओं व रोगों का शमन और भयंकर शत्रुओं पर पूर्ण विजय सुनिश्चित करता है

जाप विधि

प्रातः काल लाल आसन पर बैठकर स्फटिक या रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। विशेष लाभ हेतु इसे नवरात्रि पर्व के दौरान जपें 3।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kavach mantra

शम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8

ugra mantra

ॐ ह्ल्रीं ह्ल्रीं उग्र तारे क्रीं क्रीं फट्

shanti mantra

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

sabar mantra

गुरु गोरखनाथ की दुहाई। भूत-प्रेत भागे, मारो घुड़ाई। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना। गुरु गोरखनाथ की आग्या 13

navgrah mantra

ॐ क्रीं क्रीं हूं हूं टं टङ्कधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा॥

siddh mantra

ॐ सिं सिद्ध्यै नमः स्वाहा ।