मातृका देवी / वर्णेश्वरी (मणिपूर चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
डं, ढं, णं, तं, थं, दं, धं, नं, पं, फं
व्यक्तिगत शक्ति, आत्मविश्वास और पाचन अग्नि (Digestive fire) का ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ एकीकरण 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
व्यक्तिगत शक्ति, आत्मविश्वास और पाचन अग्नि (Digestive fire) का ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ एकीकरण 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यक्तिगत शक्ति, आत्मविश्वास और पाचन अग्नि (Digestive fire) का ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ एकीकरण
जाप विधि
नाभि चक्र की दस पंखुड़ियों पर ध्यान लगाते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत । स देवाँ एह वक्षति ॥
stotra mantraविज्ञानवृद्धिं हृदये कुरु श्रीः सौभाग्यवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः । दयासुवृद्धिं कुरुतां मयि श्रीः सुवर्णवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः ॥ 27
tantrik mantraॐ हं सं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः
bhakti mantraराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे
naam mantraवामन
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥