मातृका देवी / वर्णेश्वरी (मणिपूर चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
डं, ढं, णं, तं, थं, दं, धं, नं, पं, फं
व्यक्तिगत शक्ति, आत्मविश्वास और पाचन अग्नि (Digestive fire) का ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ एकीकरण 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
व्यक्तिगत शक्ति, आत्मविश्वास और पाचन अग्नि (Digestive fire) का ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ एकीकरण 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यक्तिगत शक्ति, आत्मविश्वास और पाचन अग्नि (Digestive fire) का ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ एकीकरण
जाप विधि
नाभि चक्र की दस पंखुड़ियों पर ध्यान लगाते हुए जप 2।
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ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।
naam mantraभ्रामरी
tantrik mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
kaamya mantraत्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
navgrah mantraॐ प्र वः शुक्राय भानवे भरध्वं हव्यं मतिं चाग्नये सुपूतम्। यो दैव्यानि मानुषा जनूंष्यन्तर्विश्वानि विद्मना जिगाति।।
mool mantraदिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा