माँ काली (दक्षिण काली / महाकाली) बीज बीज मंत्र
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इस बीज में 'क' काली, 'र' ब्रह्म और 'ई' महामाया का स्वरूप है। यह उत्तम स्वास्थ्य, असीम बल, बुरी शक्तियों से परम रक्षा, अज्ञानता का संहार और तंत्र की आठ अलौकिक सिद्धियों (अष्टसिद्धि) की प्राप्ति कराता ह
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यह मंत्र क्यों?
इस बीज में 'क' काली, 'र' ब्रह्म और 'ई' महामाया का स्वरूप है। यह उत्तम स्वास्थ्य, असीम बल, बुरी शक्तियों से परम रक्षा, अज्ञानता का संहार और तंत्र की आठ अलौकिक सिद्धियों (अष्टसिद्धि) की प्राप्ति कराता है 24।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस बीज में 'क' काली, 'र' ब्रह्म और 'ई' महामाया का स्वरूप है
यह उत्तम स्वास्थ्य, असीम बल, बुरी शक्तियों से परम रक्षा, अज्ञानता का संहार और तंत्र की आठ अलौकिक सिद्धियों (अष्टसिद्धि) की प्राप्ति कराता है
जाप विधि
रात्रिकाल या प्रातः काल, पूर्ण शुद्धता के साथ स्फटिक या रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें 26।
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श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
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