मातृका देवी / वर्णेश्वरी (आज्ञा चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
हं, क्षं
यह शिव और शक्ति का परम मिलन है, जो असीम अंतर्ज्ञान (Intuition), दिव्य दृष्टि और द्वैत भाव का विनाश सुनिश्चित करता है 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह शिव और शक्ति का परम मिलन है, जो असीम अंतर्ज्ञान (Intuition), दिव्य दृष्टि और द्वैत भाव का विनाश सुनिश्चित करता है 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह शिव और शक्ति का परम मिलन है, जो असीम अंतर्ज्ञान (Intuition), दिव्य दृष्टि और द्वैत भाव का विनाश सुनिश्चित करता है
जाप विधि
भ्रूमध्य (Third Eye) की दो पंखुड़ियों पर ध्यान करते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
gyan mantraशुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् । हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥
mool mantraॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
jap mantraॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा
sabar mantraॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥