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उद्देश्य अनुसार मंत्र
अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.८)

अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.८) वैदिक मंत्र

ॐ आ ते वत्सो मनो यमत्परमाच्चित्सधस्थात् । अग्ने त्वां कामये गिरा ॥

भक्त और भगवान के मध्य माता/पिता एवं पुत्र सदृश प्रगाढ़ आत्मीय सम्बन्ध की स्थापना एवं भगवत्-प्रेम।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

भक्त और भगवान के मध्य माता/पिता एवं पुत्र सदृश प्रगाढ़ आत्मीय सम्बन्ध की स्थापना एवं भगवत्-प्रेम।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

भक्त और भगवान के मध्य माता/पिता एवं पुत्र सदृश प्रगाढ़ आत्मीय सम्बन्ध की स्थापना एवं भगवत्-प्रेम

जाप विधि

ईश्वर के प्रति वात्सल्य और समर्पण भाव उत्पन्न करने के लिए एकांत में ध्यान के समय शान्त स्वर में गान।

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