श्री हनुमान (रुद्र अवतार) जप मंत्र
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा
असाध्य रोगों का निवारण, शत्रुओं का पूर्ण संहार और नकारात्मक शक्तियों से अभेद्य रक्षा। 65
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असाध्य रोगों का निवारण, शत्रुओं का पूर्ण संहार और नकारात्मक शक्तियों से अभेद्य रक्षा। 65
इस मंत्र से क्या होगा?
असाध्य रोगों का निवारण, शत्रुओं का पूर्ण संहार और नकारात्मक शक्तियों से अभेद्य रक्षा
जाप विधि
१०८ बार, रुद्राक्ष की माला, पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए। 65
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सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं सर्व मङ्गलाय पिङ्गलाय ॐ नमः
kaamya mantraदेव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
sabar mantraओम नमो आदेश गुरु जी को आदेश पहला गण गणपति 14 विद्या सारथी जति सती कैलाशपति बल भीम मारुती आले विघ्न निवारी साईं गोरखनाथ की दुआही गुरु की शक्ति मेरी भक्ति चले मंत्र ईश्वरी वाचा पिंड कच्चा गुरु गोरखनाथ का शब्द सच्चा 24
beej mantraह्रौं