भगवान विष्णु (अष्टाक्षरी) जप मंत्र
ॐ नमो नारायणाय
भौतिक एवं सांसारिक बंधनों से मुक्ति, वैकुण्ठ पद की प्राप्ति और दरिद्रता तथा मृत्यु भय का नाश। 2
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
भौतिक एवं सांसारिक बंधनों से मुक्ति, वैकुण्ठ पद की प्राप्ति और दरिद्रता तथा मृत्यु भय का नाश। 2
इस मंत्र से क्या होगा?
भौतिक एवं सांसारिक बंधनों से मुक्ति, वैकुण्ठ पद की प्राप्ति और दरिद्रता तथा मृत्यु भय का नाश
जाप विधि
१०८ बार या निरंतर जप, तुलसी अथवा वैजयंती की माला, पीत वस्त्र धारण कर। 2
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ धूं धूं धूं धूमावती माम रक्ष रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
beej mantraभ्रं
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
mool mantraश्री राम जय राम कोदण्ड राम
stotra mantraसर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः। सम्भवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः ॥ 12
kaamya mantraज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥