शुक्र देव जप मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
श्रेष्ठ भौतिक सुखों की प्राप्ति, दांपत्य जीवन में माधुर्य, कला के क्षेत्र में सफलता और ऐश्वर्य। 27
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
श्रेष्ठ भौतिक सुखों की प्राप्ति, दांपत्य जीवन में माधुर्य, कला के क्षेत्र में सफलता और ऐश्वर्य। 27
इस मंत्र से क्या होगा?
श्रेष्ठ भौतिक सुखों की प्राप्ति, दांपत्य जीवन में माधुर्य, कला के क्षेत्र में सफलता और ऐश्वर्य
जाप विधि
१६००० जप संख्या (४० दिन में), स्फटिक या रुद्राक्ष माला। (वैकल्पिक: ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः) 24
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ॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
dhyan mantraध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
shanti mantraॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
vaidik mantraॐ ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
beej mantraप्रां