भगवती महालक्ष्मी जप मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
स्थिर धन-संपत्ति, स्थायी ऐश्वर्य, ऋण मुक्ति, दरिद्रता नाश और व्यापार में निरंतर व निर्बाध उन्नति। 21
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
स्थिर धन-संपत्ति, स्थायी ऐश्वर्य, ऋण मुक्ति, दरिद्रता नाश और व्यापार में निरंतर व निर्बाध उन्नति। 21
इस मंत्र से क्या होगा?
स्थिर धन-संपत्ति, स्थायी ऐश्वर्य, ऋण मुक्ति, दरिद्रता नाश और व्यापार में निरंतर व निर्बाध उन्नति
जाप विधि
१०८ बार, कमलगट्टे की माला, शुक्रवार या दीपावली के दिन पीत अथवा रक्त आसन पर। घी की आहुति का भी विधान। 18
विशेष टिप्पणियाँ
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यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
vaidik mantraॐ त्वमग्ने यज्ञानां होता विश्वेषां हितः । देवेभिर्मानुषे जने ॥
mool mantraॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ चंद्राय नमः)
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bhakti mantraगोपाला गोपाला देवकीनन्दन गोपाला