नवग्रह (चंद्र) नाम मंत्र
सोम
शरीर में शीतलता, माता के सुख में वृद्धि एवं कलात्मक कौशल।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शरीर में शीतलता, माता के सुख में वृद्धि एवं कलात्मक कौशल।
इस मंत्र से क्या होगा?
शरीर में शीतलता, माता के सुख में वृद्धि एवं कलात्मक कौशल
जाप विधि
स्फटिक माला पर या जल पीते समय स्मरण।
विशेष टिप्पणियाँ
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सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥ 35
sabar mantraरक्षपाल आठवा दंड क्षेत्रपाल भैरव हाथ भर खप्पर तेल सिंदूर रक्षपाल येता अष्ट भैरव सदा रहो कृपाल दंड हमारा पिंड का प्राण वज्र हो काया कर रक्षा काली का पूत आवे दंड जावे दंड सो काल भागे 12 कोस काला दंड शीर कंटक का फोड़ हमको रख दुष्ट को पक ऐता भैरव दंड मंत्र संपूर्ण भया श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश सत्य नमो आदेश गुरु जी को आदेश ओम गुरु 10
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
ugra mantraॐ नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा
dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
beej mantraखं