इष्ट देवता के नामों का जाप
255 मंत्रगणेश
सर्वकार्य सिद्धि, बुद्धि का तीव्र विकास एवं सभी दिशाओं से मंगल की प्राप्ति।
दशरथनंदन
माता-पिता का आशीर्वाद प्राप्त होना, पितृ दोष का शमन एवं आज्ञाकारिता का गुण।
गजलक्ष्मी
पशु-धन, वाहन सुख एवं राजसी संपदा की प्राप्ति।
ब्राह्मी
ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ाव एवं सृजनात्मक (Creative) ऊर्जा का विस्फोट।
बजरंगबली
वज्र के समान दृढ़ शरीर की प्राप्ति, निर्भयता एवं शत्रुओं के हृदय में कंपन।
भार्गवी
वैवाहिक सुख, कला के क्षेत्र में अपार सफलता एवं ऐश्वर्य।
विघ्नहर्ता
तत्काल बाधा निवारण, अड़चनों का नाश एवं सफलता का मार्ग प्रशस्त होना।
चामुंडा
चंड और मुंड रूपी दुष्ट वृत्तियों का नाश एवं सर्वत्र निर्भयता।
मयूरेश्वर
भ्रम और माया रूपी सर्प का नाश एवं सत्य ज्ञान की प्राप्ति।
सरस्वती
बुद्धि की पूर्ण शुद्धि, अज्ञान का नाश एवं स्मरण शक्ति (Memory) में भारी वृद्धि।
हंसवाहिनी
'नीर-क्षीर विवेक' (सत्य और असत्य को पहचानने की क्षमता) का उच्चतम विकास।
मारुति
वायु के समान गति, यात्रा में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से पूर्ण रक्षा।
श्री
जीवन में 'श्री' (शोभा, कांति, सम्मान और धन) का अखंड वास।
महासरस्वती
तामसिक प्रवृत्तियों का नाश एवं चेतना में प्रकाश का संचार।
कपालिनी
मनुष्य के अहंकार रूपी मुंड (कपाल) का नाश एवं कुंडलिनी शक्ति का जागरण।
गजानन
स्मरण शक्ति (याद्दाश्त) का अप्रत्याशित विकास एवं जीवन में विशाल दृष्टिकोण की प्राप्ति।
इंदिरा
धन का तीव्र संचय, अनावश्यक खर्चों पर पूर्ण रोक एवं स्थिर लक्ष्मी का वास।
एकदंत
लेखन कार्य में पूर्ण एकाग्रता, बुद्धि का तीक्ष्ण होना एवं लक्ष्य हेतु त्याग की भावना।
भद्रकाली
जीवन में भद्रता (कल्याण), सुख-शांति एवं मारक रोगों (असाध्य व्याधियों) से रक्षा।
मंगलमूर्ति
सर्वत्र शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार एवं अमंगल का नाश।
राजीवलोचन
दृष्टि दोषों का शमन, सौंदर्य की प्राप्ति एवं हृदय में करुणा और दया का संचार।
गणाधीश
संगठन चलाने की कुशलता, अनुयायियों पर नियंत्रण एवं प्रशासनिक सफलता।
महालक्ष्मी
राजसी ऐश्वर्य, व्यापार में अप्रत्याशित वृद्धि एवं समाज में वर्चस्व।
महावीर
असीम पराक्रम, खेल व युद्ध में विजय एवं मानसिक उत्साह में वृद्धि।
चंचला
धन के प्रति आसक्ति का नाश एवं धन का सही (परोपकारी) दिशा में उपयोग।
वाग्देवी
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण एवं विचारों को श्रोताओं के सम्मुख सही रूप में प्रस्तुत करना।
अंजनीपुत्र
मातृ-पितृ भक्ति, सेवा भाव का विकास एवं गृह कलेश का समूल नाश।
कमला
शारीरिक सौंदर्य, सम्मोहन आकर्षण एवं सभी लौकिक/भौतिक सुखों की प्राप्ति।
ज्ञानदा
सर्वोच्च आध्यात्मिक ज्ञान (ब्रह्मज्ञान) एवं आत्म-बोध की प्राप्ति।
श्मशानकाली
मोह-माया का विच्छेदन, पूर्ण वैराग्य और उच्च स्तरीय तंत्र-सिद्धि।
रघुनंदन
कुल की वृद्धि, पुत्र-पौत्रादि का सुख एवं पारिवारिक परंपराओं का संरक्षण।
नारायणी
धर्म के मार्ग से धन की प्राप्ति, पारिवारिक शांति एवं विष्णु-कृपा।
वाणी
मुख से निकले हुए वचनों का सत्य होना एवं कटु-वचन बोलने की आदत से छुटकारा।
महाकाली
भयंकर तंत्र प्रयोगों का समूल नाश, असीम शक्ति एवं शत्रुओं का पूर्ण शमन।
गणपति
समस्त विघ्नों का समूल नाश एवं समूह का नेतृत्व (Leadership) करने की क्षमता में वृद्धि।
हरिप्रिया
भगवान हरि की भी कृपा प्राप्ति एवं सौभाग्य में दिन-दूनी वृद्धि।
विनायक
अहंकार का नाश, बिना किसी बाहरी बाधा के कार्यों में सफलता एवं संकटमुक्ति।
तारा
विपत्तियों के भवसागर से तुरंत तारना (पार लगाना) एवं वाक्-सिद्धि।
लम्बोदर
जीवन के सभी सुख-दुख, अपमान और रहस्यों को पचाने की शक्ति एवं उदारता का विकास।
रमा
जीवन में निरंतर आनंद, विलास, मधुरता और मनोरंजन की प्राप्ति।
भालचंद्र
मानसिक शीतलता, क्रोध पर त्वरित नियंत्रण एवं अगाध शांति।
राम राम
मन की एकाग्रता, तत्काल तनाव नाश एवं हृदय में प्रगाढ़ भक्ति का जागरण।
वक्रतुंड
दुष्टों के वक्र (टेढ़े) मार्ग को सीधा करना एवं जीवन में न्याय की प्राप्ति।
धनलक्ष्मी
रुके हुए धन की प्राप्ति एवं ऋण (कर्ज) से पूर्ण मुक्ति।
सिद्धिविनायक
मनोवांछित सिद्धियों और कठिन से कठिन लौकिक कार्यों में शत-प्रतिशत सफलता।
लक्ष्मी
जीवन से दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन, धान्य और स्थिर समृद्धि की प्राप्ति।
चिंतामणि
मानसिक चिंताओं का तत्काल निवारण एवं परम शांति का अनुभव।
भारती
अत्यंत प्रभावशाली वाणी, वाक्पटुता एवं वाद-विवाद (Debate) में सुनिश्चित विजय।
हेरम्ब
असहाय अवस्था में भगवान गणेश द्वारा रक्षक बनकर सहायता करना एवं निर्भयता।
श्यामा
देवी के सौम्य रूप की कृपा, सरल भक्ति एवं आंतरिक सौंदर्य की प्राप्ति।
हनुमान
असीम शारीरिक बल, बुद्धि, विद्या की प्राप्ति एवं जीव के अहंकार का नाश।
शारदा
विद्या, साहित्य और शास्त्र-ज्ञान की सहज एवं शीघ्र प्राप्ति।
कृष्ण
जन्म-जन्मांतर के अज्ञान का नाश, आत्मसाक्षात्कार एवं सर्वोच्च कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति।
कौशलेंद्र
राजसी ऐश्वर्य की प्राप्ति, संतानों का उत्तम विकास एवं मातृ-पितृ भक्ति का जागरण।
वीणावादिनी
संगीत, गायन, वादन और ललित कलाओं में निपुणता एवं स्वर-सिद्धि।
राम
मन की असीम शांति, भवसागर से मुक्ति, अंतःकरण की पूर्ण शुद्धि एवं सर्वोच्च मोक्ष की प्राप्ति।
रघुपति
जीव के अहंकार का नाश, ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण भाव का विकास एवं ईश्वर-प्राप्ति।
कालिका
सभी प्रकार के भयों (विशेषकर अकाल मृत्यु और दुर्घटना के भय) की निवृत्ति।
पद्मा
संसार रूपी कीचड़ में निर्लिप्त रहते हुए वैभव और सुखों का उपभोग।
विद्यादायिनी
कठिन से कठिन विषयों को सरलता से समझना एवं अध्ययन में एकाग्रता।