भगवान राम नाम मंत्र
रघुपति
जीव के अहंकार का नाश, ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण भाव का विकास एवं ईश्वर-प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीव के अहंकार का नाश, ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण भाव का विकास एवं ईश्वर-प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीव के अहंकार का नाश, ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण भाव का विकास एवं ईश्वर-प्राप्ति
जाप विधि
चलते-फिरते या दिनचर्या के सामान्य कार्य करते समय मानसिक रूप से स्मरण।
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ॐ सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु ॥
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
jap mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
gyan mantraॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा ॥
stotra mantraसर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥ एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । 33
mool mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः