भगवान विष्णु नाम मंत्र
विठ्ठल
शुद्ध वारकरी भक्ति, संतों का सत्संग एवं अपार आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शुद्ध वारकरी भक्ति, संतों का सत्संग एवं अपार आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति।
इस मंत्र से क्या होगा?
शुद्ध वारकरी भक्ति, संतों का सत्संग एवं अपार आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति
जाप विधि
करतल ध्वनि और नृत्य के साथ संकीर्तन रूप में उच्च स्वर में जप।
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ॐ बन्धय बन्धय मारय मारय नाशय नाशय हुं फट् स्वाहा
kavach mantraॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
jap mantraॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
beej mantraल्क्ष्मीः
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
ugra mantraओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा