भगवान शिव / शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र स्तोत्र मंत्र
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै म काराय नमः शिवाय॥ 19
पञ्च तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण, भगवान शिव की कृपा प्राप्ति, शिवलोक की प्राप्ति और शाश्वत आनंद का लाभ 19।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पञ्च तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण, भगवान शिव की कृपा प्राप्ति, शिवलोक की प्राप्ति और शाश्वत आनंद का लाभ 19।
इस मंत्र से क्या होगा?
पञ्च तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण, भगवान शिव की कृपा प्राप्ति, शिवलोक की प्राप्ति और शाश्वत आनंद का लाभ
जाप विधि
शिव सान्निध्य (शिवलिंग के समक्ष) बैठकर नियमित रूप से पाठ करें। महाशिवरात्रि तथा प्रदोष के अवसर पर विशेष जप लाभप्रद है 19।
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ॐ समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम् । समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि ॥
shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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navgrah mantraॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
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tantrik mantraॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा