भगवान श्रीविष्णु / श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्रम् (ध्यानम्) स्तोत्र मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥ 12
मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण 11।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण 11।
इस मंत्र से क्या होगा?
मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण
जाप विधि
स्नानादि के पश्चात् शुद्ध वस्त्र धारण कर एकांत में पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रातः या सायं पाठ करें। विशेष इच्छा पूर्ति हेतु 21 दिनों तक प्रतिदिन 51 पाठ का विधान है 2।
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ॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा
bhakti mantraश्री राम जय राम कोदण्ड राम
mool mantraॐ मत्स्याय नमः
kaamya mantraॐ श्रीं महालक्ष्म्यै स्वाहा।
navgrah mantraॐ शुं शुक्राय नमः
vaidik mantraॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नधातमम् ॥