बटुक भैरव (आपदुद्धारक) तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं
बच्चों की शारीरिक-मानसिक रक्षा, घोर आपत्तियों का उद्धार, अघोर तंत्र बाधा का नाश और मुकदमों में अप्रत्याशित विजय 47।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बच्चों की शारीरिक-मानसिक रक्षा, घोर आपत्तियों का उद्धार, अघोर तंत्र बाधा का नाश और मुकदमों में अप्रत्याशित विजय 47।
इस मंत्र से क्या होगा?
बच्चों की शारीरिक-मानसिक रक्षा, घोर आपत्तियों का उद्धार, अघोर तंत्र बाधा का नाश और मुकदमों में अप्रत्याशित विजय
जाप विधि
रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से जप करें। अनुष्ठान पूर्ण होने पर आम की लकड़ी पर लौंग, गुग्गुल, घृत और सुगन्धित पुष्पों से दशांश हवन करें। घर के भीतर आहुति देते समय 'स्वाहा' तथा श्मशान या घर के बाहर 'फट् स्वाहा' का प्रयोग करें 47।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥
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