तंत्र साधना के मंत्र
33 मंत्रक ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं
मोक्ष (कैवल्य) की प्राप्ति, ब्रह्मांडीय चेतना (ब्रह्म) से एकीकरण, और संपूर्ण आध्यात्मिक व भौतिक ऐश्वर्य की सर्वोच्च सिद्धि 19।
ॐ क्षं पक्ष ज्वाल जिव्हे कराल दंष्ट्रे प्रत्यंगिरे क्षं ह्रीं हुं फट्
घोर मारण अभिचार का शमन, बुरी शक्तियों से रक्षा और भयंकर तंत्र-मंत्र का शत्रु पर उलटा प्रहार (Reverse Black Magic) 62।
ॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा
सर्व भूत-प्रेत और जादू-टोना का पूर्ण विनाश, असाध्य रोगों का नाश तथा शत्रुओं द्वारा किए गए किसी भी मारण कर्म का विध्वंस 67।
ॐ सहस्रार हुं फट्
अस्त्र सिद्धि की प्राप्ति, घोर शत्रुओं का संहार और महा-विपत्तियों से तात्कालिक सुरक्षा 59।
ॐ श्री सुदर्शनाय हेतिराजाय नमः
मार्ग की बाधाओं का निवारण, अज्ञान का नाश और अभेद्य सुरक्षा चक्र का निर्माण 68।
ॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा
अकाल मृत्यु का भय दूर करना, घोर असाध्य रोगों से मुक्ति और तांत्रिक शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन 62।
ॐ हूं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद सर्व जन हृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा
किसी भी प्रकार के अभिचार (Black Magic) का नाश, शत्रुओं और जनमानस का वशीकरण (स्तंभन), तथा विवाह में आने वाली बाधाओं की निवृत्ति 72।
ॐ श्रीं ग्लौं फट्
आध्यात्मिक ज्ञान, सर्व कार्य सिद्धि, और अघोर शत्रुओं पर विजय 74।
ॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा
पति-पत्नी के मध्य विवाद की त्वरित शांति, अणिमा आदि अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति और कुबेर के समान भौतिक ऐश्वर्य की सिद्धि 71।
ॐ नमो महा पाशुपतास्त्राय स्मरण मात्रेण प्रकटय प्रकटय शीघ्रं आगच्छ आगच्छ मम सर्व शत्रु सैन्यं विध्वंसय विध्वंसय मारय मारय हुं फट्
अघोर शत्रुओं का संहार, ईर्ष्या/बुरी नज़र से रक्षा, और जीवन के महा-संघर्षों में विजय 45।
ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा अस्त्राय फट्
तंत्र साधना के दौरान उत्पन्न होने वाले विघ्नों का समूल नाश और अदृश्य बाधाओं को छिन्न-भिन्न करना 76। निष्कर्ष सनातन तांत्रिक परंपरा का उपर्युक्त शास्त्र-आधारित व…
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भुवनेश्वर्यै नमः
64 योगिनियों की प्रत्यक्ष कृपा प्राप्ति, असीम सामाजिक आकर्षण प्रभाव, ब्रह्मांड के पंचभूत रहस्यों का ज्ञान और पूर्ण निरोगी काया 23।
ॐ सर्व बुद्धि प्रदे वर्णनीय सर्व सिद्धि प्रदे डाकिनीय ॐ वज्र वैरोचनीयै नमः
महान कवित्व शक्ति, वाक् सिद्धि, दुर्लभ मनोरथों की प्राप्ति, असाध्य रोग मुक्ति, राजाओं व मंत्रियों का वशीकरण और शत्रुओं पर पूर्ण विजय 25।
ॐ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ठ: स्वाहा
दुर्भाग्य और मानसिक अवसाद का नाश, अघोर तंत्र बाधा से रक्षा, मारण और शत्रुओं का उच्चाटन 27।
धूं धूं तंत्र बंधम स्तंभय नाशाय ठ: ठ: फट्
भयंकर तांत्रिक बंधनों को काटना, काले जादू (Black Magic) और बुरी नज़र का स्तंभन एवं समूल विनाश 29।
ॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
असाध्य ज्वर, पिशाच ज्वर, कृत्रिम तंत्र-जनित रोग, शारीरिक शूल और महामारियों का पूर्ण शमन 30।
ॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्री बगलाने मम रिपून नाशय नाशय ममैश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवांछितं साधय साधय ह्रीं स्वाहा
विरोधियों और शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन, कानूनी विवाद और कोर्ट-कचहरी में एकतरफा विजय, तथा अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति 31।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
अष्ट सिद्धि की प्राप्ति, भूत-प्रेत तथा अघोर बाधा निवारण, सांसारिक बंधनों से मुक्ति, तथा साधक के भीतर के क्रोध, काम और अहंकार का पूर्ण विनाश 8।
ॐ नाशय नाशय सर्व दुष्टं नाशय फट् स्वाहा अरुण वरुण माला लंकृता शंकराग्रे विद्रुत परसु शक्तिम पुष्प बाणुचापंम विविध फण फणंद्र भूषण भूषितंग शरबिलनाथं नौम्य सालुवे
भयंकर तंत्र प्रयोगों (नृसिंह जैसी उग्र ऊर्जा के अनियंत्रित प्रभाव) का उच्चाटन, भूत-प्रेत और ग्रह बंधनों से तत्काल मुक्ति 46।
ॐ स्वर्णाकर्षण भैरवं देवं सर्व शक्ति समन्वितम् सर्व अभीष्ट फलं देहि श्री क्षेत्रपाल नमोस्तुते
भौतिक संपन्नता के साथ-साथ शिव-तत्व और मोक्ष की प्राप्ति (तमो गुण से ज्योति की ओर प्रस्थान) 53।
ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय धन धान्य वृद्धिकराय शीघ्रं वश्यं कुरु कुरु स्वाहा
घोर दरिद्रता का निवारण, अपार धन-संपत्ति (स्वर्ण) की प्राप्ति, कुबेर के समान ऐश्वर्य और कर्जों से तुरंत मुक्ति 53।
ऐं क्लीं सौः
वाक्-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, कामराज आकर्षण के माध्यम से सर्वजन वशीकरण और भौतिक कामनाओं की त्वरित पूर्ति 13।
ॐ काल कालाय विद्महे कालातीताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात्
समय (काल) के भय से मुक्ति, उग्र तंत्र सिद्धियों की प्राप्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा 51।
ॐ हं सं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः
जीवन के घोर संकटों को तत्क्षण भस्म करना और साधक के चारों ओर अभेद्य तांत्रिक सुरक्षा घेरा सक्रिय करना 49।
ॐ बं बटुकाय नमः
बच्चों को दीर्घकालिक रोगों, अदृश्य शक्तियों और बुरी नज़र से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करना 44।
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं
बच्चों की शारीरिक-मानसिक रक्षा, घोर आपत्तियों का उद्धार, अघोर तंत्र बाधा का नाश और मुकदमों में अप्रत्याशित विजय 47।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
सर्व बाधाओं का नाश, नवदुर्गा की सम्मिलित शक्तियों का जागरण, और असीम साहस तथा तंत्र-रक्षा की प्राप्ति 41।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौः जगत्प्रसूत्यै नमः
दरिद्रता का समूल नाश, अष्ट ऐश्वर्य, परम वैभव और तंत्र-लक्ष्मी की प्राप्ति 38।
ॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः
सामाजिक आकर्षण (Social Charisma) में अपार वृद्धि, मानसिक शांति और संगीत/कला में उच्च कोटि की निपुणता 37।
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
जीवन के विघ्नों का उग्र शमन, अज्ञान का नाश, तंत्र बाधा निवारण और परम वाक्-सिद्धि की प्राप्ति 36।
ॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा
साधना काल में बाहरी और अदृश्य आसुरी शक्तियों से सुरक्षा तथा सर्व-सैन्य कीलन 35।
ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा
दुष्ट शत्रुओं की वाणी, मुख, पैर और बुद्धि का पूर्ण स्तंभन (Paralysis of enemies' actions and speech) 32।
ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्
घोर संकटों से रक्षा, वाक्-सिद्धि की प्राप्ति, उच्चाधिकारियों से कृपा व कार्य सिद्धि, और प्रबल शत्रुओं तथा प्रतियोगिताओं में पूर्ण विजय 16।