बगलामुखी तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्री बगलाने मम रिपून नाशय नाशय ममैश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवांछितं साधय साधय ह्रीं स्वाहा
विरोधियों और शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन, कानूनी विवाद और कोर्ट-कचहरी में एकतरफा विजय, तथा अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति 31।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
विरोधियों और शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन, कानूनी विवाद और कोर्ट-कचहरी में एकतरफा विजय, तथा अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति 31।
इस मंत्र से क्या होगा?
विरोधियों और शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन, कानूनी विवाद और कोर्ट-कचहरी में एकतरफा विजय, तथा अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति
जाप विधि
प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर लकड़ी के आसन पर पीला वस्त्र बिछाकर बैठें। स्वयं पीत वस्त्र धारण कर हल्दी (हरिद्रा) की माला से 1,25,000 बार जप का अनुष्ठान करें। पूजन में केवल पीले पुष्पों और पीली सामग्री का ही प्रयोग करें 31।
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ॐ पातु शिरसि नित्यं पातु ह्रीं कण्ठदेशके। नृसिंह पातु हृदये आपदुद्धारणाय च॥
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
ugra mantraॐ अक्षय श्री छिन्नमस्ता देवी जगत निवासनी अदृश्य सिद्धि शून्य गमन विजयै मम सिद्धि देहि देहि प्राण देहि देहि मम अमुक गौत्र अमुक शर्मा ह गुरूत्वाकर्षण शक्ति नाशय शून्य सिद्धि प्राप्तर्थं शक्ति स्याद विनियोग
naam mantraपवनपुत्र
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
vaidik mantraॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् । स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलम् ॥