दक्षिणा काली (शापविमोचन साधना) सिद्ध मंत्र
कालीं कूर्चं परं नाम दक्षिणे दक्षिणे कालिके तता । वशिष्ठ मन्त्रं प्रोच्च्यार्थ मोचय दयमीश्वरि कालीं कूर्चं परे निरमेशास्याश्चापहारिणी ॥ कालीं भीमं ठटं भद्रकाली भीमं शिवस्यहि शापं मोचय युग्मापो विध्येयं चापहारिणी ॥
महाविद्या के मंत्र को वशिष्ठ मुनि के शाप से मुक्त करना 12। इसके प्रयोग से मुख्य साधना के दौरान आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं, साधक को गुरु-सुरक्षा प्राप्त होती है, और मंत्र अपनी पूर्ण अलौकिक क्षमता
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यह मंत्र क्यों?
महाविद्या के मंत्र को वशिष्ठ मुनि के शाप से मुक्त करना 12। इसके प्रयोग से मुख्य साधना के दौरान आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं, साधक को गुरु-सुरक्षा प्राप्त होती है, और मंत्र अपनी पूर्ण अलौकिक क्षमता के साथ कार्य कर सिद्धियों को बिना किसी दुष्प्रभाव के प्रकट करता है 12।
इस मंत्र से क्या होगा?
महाविद्या के मंत्र को वशिष्ठ मुनि के शाप से मुक्त करना 12
इसके प्रयोग से मुख्य साधना के दौरान आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं, साधक को गुरु-सुरक्षा प्राप्त होती है, और मंत्र अपनी पूर्ण अलौकिक क्षमता के साथ कार्य कर सिद्धियों को बिना किसी दुष्प्रभाव के प्रकट करता है
जाप विधि
मुख्य दक्षिणा काली मंत्र के पुरश्चरण या नित्य जप से पूर्व इसका एक बार उच्चारण किया जाता है 12। शास्त्रानुसार, प्राचीन काल में वशिष्ठ ऋषि द्वारा इस विद्या को कीलित कर दिया गया था, अतः बिना शापविमोचन के मंत्र निष्फल रहता है 12। इसमें विशिष्ट बीज मंत्रों को कूट रूप में (जैसे 'कूर्चं' = 'हूं', 'परं' = 'ह्रीं') गुंथा गया है 12।
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