ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
उच्छिष्ट गणपति (दशाक्षर)

उच्छिष्ट गणपति (दशाक्षर) सिद्ध मंत्र

ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।

यह शिव और शक्ति (Brahman) के परम मिलन का प्रतीक है 52। इसके प्रभाव से बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं में अजेय विजय मिलती है, और नौकरी या व्यवसाय से संबंधित ब

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यह शिव और शक्ति (Brahman) के परम मिलन का प्रतीक है 52। इसके प्रभाव से बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं में अजेय विजय मिलती है, और नौकरी या व्यवसाय से संबंधित बाधाएं तत्काल दूर होती हैं 51।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यह शिव और शक्ति (Brahman) के परम मिलन का प्रतीक है 52

02

इसके प्रभाव से बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं में अजेय विजय मिलती है, और नौकरी या व्यवसाय से संबंधित बाधाएं तत्काल दूर होती हैं

जाप विधि

विशिष्ट कर न्यास अनिवार्य है: 'ॐ हस्ति' पर दोनों तर्जनी को अंगूठे पर फेरें, 'ॐ पिशाचि' पर अंगूठे को तर्जनी पर, और 'ॐ लिखे' पर अंगूठे को मध्यमा उंगली पर स्पर्श करें 52। इसके पश्चात निर्धारित माला से जप करें 52।

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