उच्छिष्ट गणपति (दशाक्षर) सिद्ध मंत्र
ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।
यह शिव और शक्ति (Brahman) के परम मिलन का प्रतीक है 52। इसके प्रभाव से बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं में अजेय विजय मिलती है, और नौकरी या व्यवसाय से संबंधित ब
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यह शिव और शक्ति (Brahman) के परम मिलन का प्रतीक है 52। इसके प्रभाव से बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं में अजेय विजय मिलती है, और नौकरी या व्यवसाय से संबंधित बाधाएं तत्काल दूर होती हैं 51।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह शिव और शक्ति (Brahman) के परम मिलन का प्रतीक है 52
इसके प्रभाव से बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं में अजेय विजय मिलती है, और नौकरी या व्यवसाय से संबंधित बाधाएं तत्काल दूर होती हैं
जाप विधि
विशिष्ट कर न्यास अनिवार्य है: 'ॐ हस्ति' पर दोनों तर्जनी को अंगूठे पर फेरें, 'ॐ पिशाचि' पर अंगूठे को तर्जनी पर, और 'ॐ लिखे' पर अंगूठे को मध्यमा उंगली पर स्पर्श करें 52। इसके पश्चात निर्धारित माला से जप करें 52।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ह्रीं क्षं भक्ष ज्वाला जिह्वे कराल दंष्ट्रे प्रत्यंगिरे क्षं ह्रीं हूं फट्
stotra mantraकुंचितै: कुन्तलैर्भ्राजमानाननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयो:। हारकेयूरकं कंकणप्रोज्ज्वलं किंकिणीमंजुलं श्यामलं तं भजे।। 9
vaidik mantraॐ अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत । स देवाँ एह वक्षति ॥
naam mantraभार्गव
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
bhakti mantraॐ नमो नारसिंहाय