अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.७) वैदिक मंत्र
ॐ एह् ऊ षु ब्रवाणि तेऽग्न इत्थेतरा गिरः । एभिर्वर्धास इन्दुभिः ॥
शुद्ध वाणी की प्राप्ति, ईश्वरीय सान्निध्य का अनुभव एवं आध्यात्मिक समृद्धि (सोम) की वृद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शुद्ध वाणी की प्राप्ति, ईश्वरीय सान्निध्य का अनुभव एवं आध्यात्मिक समृद्धि (सोम) की वृद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
शुद्ध वाणी की प्राप्ति, ईश्वरीय सान्निध्य का अनुभव एवं आध्यात्मिक समृद्धि (सोम) की वृद्धि
जाप विधि
आध्यात्मिक उत्कर्ष की कामना से शान्त मनःस्थिति में सोमरस (आध्यात्मिक ऊर्जा) के ध्यान के साथ गान।
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