अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.७) वैदिक मंत्र
ॐ एह् ऊ षु ब्रवाणि तेऽग्न इत्थेतरा गिरः । एभिर्वर्धास इन्दुभिः ॥
शुद्ध वाणी की प्राप्ति, ईश्वरीय सान्निध्य का अनुभव एवं आध्यात्मिक समृद्धि (सोम) की वृद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शुद्ध वाणी की प्राप्ति, ईश्वरीय सान्निध्य का अनुभव एवं आध्यात्मिक समृद्धि (सोम) की वृद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
शुद्ध वाणी की प्राप्ति, ईश्वरीय सान्निध्य का अनुभव एवं आध्यात्मिक समृद्धि (सोम) की वृद्धि
जाप विधि
आध्यात्मिक उत्कर्ष की कामना से शान्त मनःस्थिति में सोमरस (आध्यात्मिक ऊर्जा) के ध्यान के साथ गान।
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शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ 10
sabar mantraॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
ugra mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
naam mantraकमला
navgrah mantraॐ अश्वाध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
jap mantraॐ सिद्धि वराय नमः