ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
अग्नि / अग्नि सूक्त (१.१.१)

अग्नि / अग्नि सूक्त (१.१.१) वैदिक मंत्र

ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नधातमम् ॥

यज्ञीय ऊर्जा का आवाहन, अज्ञान का नाश, आध्यात्मिक तेज एवं लौकिक सिद्धियों की प्राप्ति।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यज्ञीय ऊर्जा का आवाहन, अज्ञान का नाश, आध्यात्मिक तेज एवं लौकिक सिद्धियों की प्राप्ति।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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यज्ञीय ऊर्जा का आवाहन, अज्ञान का नाश, आध्यात्मिक तेज एवं लौकिक सिद्धियों की प्राप्ति

जाप विधि

दैनिक यज्ञ अथवा देवपूजन के आरम्भ में, प्रातःकाल पूर्वाभिमुख होकर, ३ से ११ बार सस्वर और स्पष्ट पाठ।

विशेष टिप्पणियाँ

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