ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
अग्नि / अग्नि सूक्त (१.१.१)

अग्नि / अग्नि सूक्त (१.१.१) वैदिक मंत्र

ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नधातमम् ॥

यज्ञीय ऊर्जा का आवाहन, अज्ञान का नाश, आध्यात्मिक तेज एवं लौकिक सिद्धियों की प्राप्ति।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यज्ञीय ऊर्जा का आवाहन, अज्ञान का नाश, आध्यात्मिक तेज एवं लौकिक सिद्धियों की प्राप्ति।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यज्ञीय ऊर्जा का आवाहन, अज्ञान का नाश, आध्यात्मिक तेज एवं लौकिक सिद्धियों की प्राप्ति

जाप विधि

दैनिक यज्ञ अथवा देवपूजन के आरम्भ में, प्रातःकाल पूर्वाभिमुख होकर, ३ से ११ बार सस्वर और स्पष्ट पाठ।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kaamya mantra

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥

tantrik mantra

ॐ स्वर्णाकर्षण भैरवं देवं सर्व शक्ति समन्वितम् सर्व अभीष्ट फलं देहि श्री क्षेत्रपाल नमोस्तुते

shanti mantra

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

mool mantra

ॐ श्री हनुमते नमः

dhyan mantra

बर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्। रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दैर्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः॥

beej mantra

वं, शं, षं, सं