ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
संज्ञान / संगठन सूक्त (१०.१९१.२)

संज्ञान / संगठन सूक्त (१०.१९१.२) वैदिक मंत्र

ॐ सङ्गच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते ॥

समाज में एकता, वैचारिक सामंजस्य, संगठन शक्ति की वृद्धि एवं भ्रातृत्व भाव की स्थापना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

समाज में एकता, वैचारिक सामंजस्य, संगठन शक्ति की वृद्धि एवं भ्रातृत्व भाव की स्थापना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

समाज में एकता, वैचारिक सामंजस्य, संगठन शक्ति की वृद्धि एवं भ्रातृत्व भाव की स्थापना

जाप विधि

सामाजिक सम्मेलनों, सामूहिक उपासना अथवा यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात् उपस्थित जन-समूह द्वारा एक स्वर में सस्वर पाठ।

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