कल्याण / स्वस्ति मंत्र (१.३१.४) वैदिक मंत्र
ॐ स्वस्ति मात्र उत पित्रे नो अस्तु स्वस्ति गोभ्यो जगते पुरुषेभ्यः । विश्वं सुभूतं सुविदत्रं नो अस्तु ज्योगेव दृशेम सूर्यम् ॥
माता-पिता, गौ, पर्यावरण और सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याण की कामना एवं सुदृढ़, चिरंतन आध्यात्मिक दृष्टि।
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यह मंत्र क्यों?
माता-पिता, गौ, पर्यावरण और सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याण की कामना एवं सुदृढ़, चिरंतन आध्यात्मिक दृष्टि।
इस मंत्र से क्या होगा?
माता-पिता, गौ, पर्यावरण और सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याण की कामना एवं सुदृढ़, चिरंतन आध्यात्मिक दृष्टि
जाप विधि
प्रातः शय्या-त्याग के पश्चात् माता-पिता को प्रणाम करते समय अथवा पारिवारिक अनुष्ठानों में सम्मिलित रूप से पाठ।
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ॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
navgrah mantraॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
dhyan mantraअहं ब्रह्मास्मि
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
gyan mantraआ मां मेधा सुरभिर्विश्वरुपा हिरण्यवर्णा जगती जगम्या । ऊर्जस्वती पयसा पिन्वमाना सा मां मेधा सुप्रतीका जुषन्ताम् ॥
kavach mantraनासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31