कल्याण / स्वस्ति मंत्र (१.३१.४) वैदिक मंत्र
ॐ स्वस्ति मात्र उत पित्रे नो अस्तु स्वस्ति गोभ्यो जगते पुरुषेभ्यः । विश्वं सुभूतं सुविदत्रं नो अस्तु ज्योगेव दृशेम सूर्यम् ॥
माता-पिता, गौ, पर्यावरण और सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याण की कामना एवं सुदृढ़, चिरंतन आध्यात्मिक दृष्टि।
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यह मंत्र क्यों?
माता-पिता, गौ, पर्यावरण और सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याण की कामना एवं सुदृढ़, चिरंतन आध्यात्मिक दृष्टि।
इस मंत्र से क्या होगा?
माता-पिता, गौ, पर्यावरण और सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याण की कामना एवं सुदृढ़, चिरंतन आध्यात्मिक दृष्टि
जाप विधि
प्रातः शय्या-त्याग के पश्चात् माता-पिता को प्रणाम करते समय अथवा पारिवारिक अनुष्ठानों में सम्मिलित रूप से पाठ।
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