विपरीत प्रत्यंगिरा उग्र मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं प्रत्यंगिरे सर्वदुष्टान प्राचं छिन्धि छिन्धि
उग्र रक्षात्मक कवच का निर्माण, दुष्टों व शत्रुओं के प्राण व बुद्धि का तीव्र विच्छेदन 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
उग्र रक्षात्मक कवच का निर्माण, दुष्टों व शत्रुओं के प्राण व बुद्धि का तीव्र विच्छेदन 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
उग्र रक्षात्मक कवच का निर्माण, दुष्टों व शत्रुओं के प्राण व बुद्धि का तीव्र विच्छेदन
जाप विधि
कुलार्णव तंत्र और रुद्रयामल तंत्र के निर्देशानुसार, बिना गुरु दीक्षा और उचित संस्कार के इस उग्र मंत्र का जप अनिष्टकारी हो सकता है। सुयोग्य तंत्राचार्य के मार्गदर्शन में ही जप करें 3।
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ॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
stotra mantraकूजन्तं राम-रामेति मधुरं मधुराक्षरम् । आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥ 16
beej mantraस्त्रीं
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
kaamya mantraदेवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥