ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
काल भैरव (तांडव स्वरूप)

काल भैरव (तांडव स्वरूप) उग्र मंत्र

ओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा

छिपे शत्रु, प्रबल तंत्र-मंत्र व नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश, शत्रु की चाल उसी पर उलट देना तथा जीवन में विजय का संचार 19।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारउग्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

छिपे शत्रु, प्रबल तंत्र-मंत्र व नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश, शत्रु की चाल उसी पर उलट देना तथा जीवन में विजय का संचार 19।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

छिपे शत्रु, प्रबल तंत्र-मंत्र व नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश, शत्रु की चाल उसी पर उलट देना तथा जीवन में विजय का संचार

जाप विधि

शनिवारी या मध्यरात्रि के समय दीप और गुग्गुल जलाकर शांत स्थान पर शुद्ध मन से 11, 21 या 108 बार जाप व श्रवण किया जाता है 19।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

beej mantra

श्रौं

navgrah mantra

ॐ लोहिताक्षाय विद्महे भूलाभाय धीमहि तन्नोऽङ्गारकः प्रचोदयात्।

jap mantra

ॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो

dhyan mantra

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

mool mantra

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः

shanti mantra

ॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः । गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥