काल भैरव (तांडव स्वरूप) उग्र मंत्र
ओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा
छिपे शत्रु, प्रबल तंत्र-मंत्र व नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश, शत्रु की चाल उसी पर उलट देना तथा जीवन में विजय का संचार 19।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
छिपे शत्रु, प्रबल तंत्र-मंत्र व नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश, शत्रु की चाल उसी पर उलट देना तथा जीवन में विजय का संचार 19।
इस मंत्र से क्या होगा?
छिपे शत्रु, प्रबल तंत्र-मंत्र व नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश, शत्रु की चाल उसी पर उलट देना तथा जीवन में विजय का संचार
जाप विधि
शनिवारी या मध्यरात्रि के समय दीप और गुग्गुल जलाकर शांत स्थान पर शुद्ध मन से 11, 21 या 108 बार जाप व श्रवण किया जाता है 19।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
मारुत
kaamya mantraविद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
vaidik mantraॐ अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
tantrik mantraॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा
beej mantraद्रीं