असितांग भैरव (तांत्रिक स्वरूप) उग्र मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं असितांग भैरवाय नमः
नीर-क्षीर विवेक की प्राप्ति, सृजन क्षमता का विकास, अद्भुत कल्पनाशक्ति तथा किसी भी प्रकार के पुराने शाप (Curse) से मुक्ति 23।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
नीर-क्षीर विवेक की प्राप्ति, सृजन क्षमता का विकास, अद्भुत कल्पनाशक्ति तथा किसी भी प्रकार के पुराने शाप (Curse) से मुक्ति 23।
इस मंत्र से क्या होगा?
नीर-क्षीर विवेक की प्राप्ति, सृजन क्षमता का विकास, अद्भुत कल्पनाशक्ति तथा किसी भी प्रकार के पुराने शाप (Curse) से मुक्ति
जाप विधि
कालाष्टमी (कृष्ण पक्ष की अष्टमी), रविवार की रात्रि या ग्रहण काल में यह साधना की जाती है। साधक पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे, काले या गहरे नीले वस्त्र धारण करे। रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से शिवालय या नदी तट पर चार मुखी सरसों के तेल का दीपक जलाकर जप करें 23।
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