श्मशान काली उग्र मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे श्मशान कालिकायै सर्व बाधा निवारणाय सर्व शत्रु संहारणाय मम रक्षां कुरु कुरु स्वाहा
घोर भूत-प्रेत बाधा नाश, अज्ञान-अंधकार और कुमति का निवारण, प्रबल शत्रु का उग्र संहार 13।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घोर भूत-प्रेत बाधा नाश, अज्ञान-अंधकार और कुमति का निवारण, प्रबल शत्रु का उग्र संहार 13।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर भूत-प्रेत बाधा नाश, अज्ञान-अंधकार और कुमति का निवारण, प्रबल शत्रु का उग्र संहार
जाप विधि
एकांत में माता की प्रतिमा के समक्ष संकल्प लेकर 11, 21 या 108 बार 21 दिन तक नियमित जाप। मन में स्थिरता और आध्यात्मिक सुरक्षा की भावना रखना अनिवार्य है 13।
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ॐ ह्रीं सरस्वत्यै नमः
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
beej mantraग्रां
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
stotra mantraअविकाराय शुद्धाय नित्याय परमात्मने । सदैकरूपरूपाय विष्णवे सर्वजिष्णवे ॥ 10
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥