दक्षिण काली उग्र मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
घातक तंत्र बाधा, पारिवारिक विघटन, भारी ऑब्सटेकल (obstacles) व भीषण शत्रु बाधा का तत्काल निवारण 14।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घातक तंत्र बाधा, पारिवारिक विघटन, भारी ऑब्सटेकल (obstacles) व भीषण शत्रु बाधा का तत्काल निवारण 14।
इस मंत्र से क्या होगा?
घातक तंत्र बाधा, पारिवारिक विघटन, भारी ऑब्सटेकल (obstacles) व भीषण शत्रु बाधा का तत्काल निवारण
जाप विधि
जब अन्य सभी उपाय विफल हो जाएं, तब दक्षिण दिशा की ओर मुख कर, मुंड मुद्रा में, शनिवार या अमावस्या के सूर्यास्त के बाद साधना करें। आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते हुए 10 बार प्राणायाम करें और फिर 10 मिनट तक लगातार जप करें 14।
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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
jap mantraॐ कालभैरवाय नमः
beej mantraभ्रौं
dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
stotra mantraस्वयम्भूः शम्भुरादित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः । अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः॥ 12