माँ दुर्गा (शांत एवं रक्षक स्वरूप) ध्यान मंत्र
ॐ जटाजूटसमायुक्तमर्धेन्दुकृतलक्षणम्। लोचनत्रयसंयुक्तं पातु मां सर्वतोमुखीम्॥
मन से सभी प्रकार के भयों को दूर करना, ध्यान के दौरान सभी दिशाओं से आध्यात्मिक सुरक्षा का आवरण बनाना, और गहन आंतरिक शांति का अनुभव।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन से सभी प्रकार के भयों को दूर करना, ध्यान के दौरान सभी दिशाओं से आध्यात्मिक सुरक्षा का आवरण बनाना, और गहन आंतरिक शांति का अनुभव।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन से सभी प्रकार के भयों को दूर करना, ध्यान के दौरान सभी दिशाओं से आध्यात्मिक सुरक्षा का आवरण बनाना, और गहन आंतरिक शांति का अनुभव
जाप विधि
ध्यान के समय सुखासन में बैठकर शांत अवस्था में इसका श्रवण या मानसिक जप करें। माता दुर्गा को जटाओं से युक्त, मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किए और त्रिनेत्रों वाली देवी के रूप में एकाग्र करें।
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