श्री कृष्ण (जगद्गुरु स्वरूप) ध्यान मंत्र
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
परमानंद की अनुभूति, मन के भीतर बैठे अज्ञान रूपी वृत्तियों का नाश, और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए ईश्वर से जुड़ाव।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
परमानंद की अनुभूति, मन के भीतर बैठे अज्ञान रूपी वृत्तियों का नाश, और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए ईश्वर से जुड़ाव।
इस मंत्र से क्या होगा?
परमानंद की अनुभूति, मन के भीतर बैठे अज्ञान रूपी वृत्तियों का नाश, और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए ईश्वर से जुड़ाव
जाप विधि
पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर इस श्लोक का मानसिक मनन करें। कृष्ण को ब्रह्मांड के परम गुरु मानकर शरणागति का भाव रखें और श्वास को सामान्य रखते हुए अर्थ का अनुभव करें।
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