ईश्वर / सार्वभौमिक चेतना (प्रणव) ध्यान मंत्र
ॐ
चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना
जाप विधि
सुखासन में बैठकर अत्यंत सजगता और मंद गति से 'ॐ' का उच्चारण करें। जप के साथ-साथ इसके अर्थ (सृष्टि की पारलौकिक चेतना) पर मानसिक चिंतन (तज्जपस्तदर्थभावनम्) करें। बाह्य ध्वनि को धीरे-धीरे मानसिक नाद में बदल दें।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ सहस्रार हुं फट्
tantrik mantraॐ श्रीं ग्लौं फट्
navgrah mantraॐ गजध्वजाय विद्महे शुकहस्ताय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।
kaamya mantraॐ श्रीं महालक्ष्म्यै स्वाहा।
sabar mantraगुरु गोरखनाथ की दुहाई। भूत-प्रेत भागे, मारो घुड़ाई। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना। गुरु गोरखनाथ की आग्या 13
bhakti mantraसर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते