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उद्देश्य अनुसार मंत्र
ईश्वर / सार्वभौमिक चेतना (प्रणव)

ईश्वर / सार्वभौमिक चेतना (प्रणव) ध्यान मंत्र

चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना

जाप विधि

सुखासन में बैठकर अत्यंत सजगता और मंद गति से 'ॐ' का उच्चारण करें। जप के साथ-साथ इसके अर्थ (सृष्टि की पारलौकिक चेतना) पर मानसिक चिंतन (तज्जपस्तदर्थभावनम्) करें। बाह्य ध्वनि को धीरे-धीरे मानसिक नाद में बदल दें।

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