ईश्वर / सार्वभौमिक चेतना (प्रणव) ध्यान मंत्र
ॐ
चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
चित्त को एकाग्र (One-pointed) करना, साधना के सभी विक्षेपों (रोग, आलस्य आदि) का नाश, और चेतना को अंतर्मुखी बनाकर शून्यता में विलीन करना
जाप विधि
सुखासन में बैठकर अत्यंत सजगता और मंद गति से 'ॐ' का उच्चारण करें। जप के साथ-साथ इसके अर्थ (सृष्टि की पारलौकिक चेतना) पर मानसिक चिंतन (तज्जपस्तदर्थभावनम्) करें। बाह्य ध्वनि को धीरे-धीरे मानसिक नाद में बदल दें।
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ॐ प्रं प्राप्त्यै नमः स्वाहा ।
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
naam mantraगोपाल
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bhakti mantraॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः
tantrik mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा