ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
नवग्रह (सामूहिक)

नवग्रह (सामूहिक) नवग्रह मंत्र

ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥

जन्म पत्रिका में एक से अधिक ग्रहों के नीच, शत्रु क्षेत्रीय या पाप कर्तरी प्रभाव में होने पर सामूहिक रूप से सभी नवग्रहों की शांति हेतु इसका उपयोग किया जाता है। मारकेश दशा, अष्टम भाव के गोचर जनित दोषों

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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जाप संख्या१०८ (न्यूनतम १ माला)
जाप दिवसप्रतिदिन / अनुष्ठान पूर्व
प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

जन्म पत्रिका में एक से अधिक ग्रहों के नीच, शत्रु क्षेत्रीय या पाप कर्तरी प्रभाव में होने पर सामूहिक रूप से सभी नवग्रहों की शांति हेतु इसका उपयोग किया जाता है। मारकेश दशा, अष्टम भाव के गोचर जनित दोषों और जीवन में आ रहे अकारण और निरंतर अवरोधों को नष्ट कर पारिवारिक सुख, शांति एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के मध्य समग्र संतुलन स्थापित करने के लिए यह अत्यंत अचूक प्रयोग है। 1

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जन्म पत्रिका में एक से अधिक ग्रहों के नीच, शत्रु क्षेत्रीय या पाप कर्तरी प्रभाव में होने पर सामूहिक रूप से सभी नवग्रहों की शांति हेतु इसका उपयोग किया जाता है

02

मारकेश दशा, अष्टम भाव के गोचर जनित दोषों और जीवन में आ रहे अकारण और निरंतर अवरोधों को नष्ट कर पारिवारिक सुख, शांति एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के मध्य समग्र संतुलन स्थापित करने के लिए यह अत्यंत अचूक प्रयोग है

जाप विधि

इस पौराणिक मंत्र का जप नित्य प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर नवग्रह मंडल अथवा वेदी के समक्ष पूर्व दिशा की ओर मुख करके किया जाना चाहिए। रुद्राक्ष अथवा तुलसी की एक सौ आठ मनकों वाली माला का उपयोग करते हुए नियमित रूप से एक माला जप का विधान है। किसी भी विशिष्ट नवग्रह शांति यज्ञ अथवा महाअनुष्ठान को आरंभ करने से पूर्व संकल्प लेकर इस मंत्र का उच्चारण अनिवार्य माना गया है ताकि सभी ग्रहों का आह्वान एक साथ किया जा सके। 1

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