सूर्य नवग्रह मंत्र
ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात्।
शत्रुओं पर पूर्ण विजय, असाध्य शारीरिक रोगों से मुक्ति और समाज में उच्च पद-प्रतिष्ठा व अनंत ऊर्जा की प्राप्ति हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शत्रुओं पर पूर्ण विजय, असाध्य शारीरिक रोगों से मुक्ति और समाज में उच्च पद-प्रतिष्ठा व अनंत ऊर्जा की प्राप्ति हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
शत्रुओं पर पूर्ण विजय, असाध्य शारीरिक रोगों से मुक्ति और समाज में उच्च पद-प्रतिष्ठा व अनंत ऊर्जा की प्राप्ति हेतु
जाप विधि
आदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ के साथ या स्वतंत्र रूप से रविवार को एक सौ आठ बार लाल चंदन की माला से जप। 16
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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraरामेश्वर
bhakti mantraॐ गौरीशंकराय नमः
vaidik mantraॐ पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भाव्यम् । उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति ॥
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