ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
शनि

शनि नवग्रह मंत्र

ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु न:।।

शनि की महाकष्टकारी साढ़ेसाती, ढैय्या, मारक महादशा, शनि के मेष राशि (नीच) में होने पर उत्पन्न भयंकर वात रोग, दीर्घकालिक असाध्य बीमारियों, नौकरी या व्यापार में अचानक पतन, और जीवन में अकारण हो रहे घोर वि

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

शनि की महाकष्टकारी साढ़ेसाती, ढैय्या, मारक महादशा, शनि के मेष राशि (नीच) में होने पर उत्पन्न भयंकर वात रोग, दीर्घकालिक असाध्य बीमारियों, नौकरी या व्यापार में अचानक पतन, और जीवन में अकारण हो रहे घोर विलंब को दूर कर धैर्य, कर्मठता और न्याय की प्राप्ति हेतु यह यजुर्वेदीय मंत्र अचूक है। 2

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

शनि की महाकष्टकारी साढ़ेसाती, ढैय्या, मारक महादशा, शनि के मेष राशि (नीच) में होने पर उत्पन्न भयंकर वात रोग, दीर्घकालिक असाध्य बीमारियों, नौकरी या व्यापार में अचानक पतन, और जीवन में अकारण हो रहे घोर विलंब को दूर कर धैर्य, कर्मठता और न्याय की प्राप्ति हेतु यह यजुर्वेदीय मंत्र अचूक है

जाप विधि

शनिवार को सायं या रात्रिकाल में शनि की होरा अथवा पुष्य, अनुराधा या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में पश्चिम दिशा की ओर मुख करके आरंभ करें। काले या नीले आसन पर बैठकर नीलम अथवा रुद्राक्ष की माला से चालीस दिनों के भीतर तेईस हजार मंत्रों का जप अनिवार्य है। अनुष्ठान के पूर्ण होने पर काले तिल मिश्रित शमी वृक्ष की लकड़ी से दशांश हवन करें। 7

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